फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को श्री रामकृष्ण परमहंस जी की जयंती श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाती है। वे भारत के महान संत और गहन आध्यात्मिक विचारक थे, जिनके उपदेशों ने अनेक लोगों को प्रभावित किया। उनके ही सान्निध्य में नरेंद्रनाथ दत्त ने आध्यात्मिक मार्ग पाया, जिन्हें आज हम स्वामी विवेकानंद के नाम से जानते हैं। श्री रामकृष्ण परमहंस माँ काली के अनन्य भक्त थे और उन्होंने अपना अधिकांश जीवन परम भक्ति में ही व्यतीत किया। उनका बचपन का नाम गदाधर था। बचपन से ही वे अत्यंत कुशाग्र बुद्धि के थे, जिसके कारण उन्हें पुराण, रामायण, महाभारत और भगवद्गीता जैसे ग्रंथ कंठस्थ हो गए थे। हिंदू धर्म में ‘परमहंस’ की उपाधि उस साधक को दी जाती है, जो आध्यात्मिक साधना की सर्वोच्च अवस्था, अर्थात् समाधि के चरम स्तर तक पहुँच चुका होता है। श्री रामकृष्ण परमहंस का जीवन इसी उच्च आध्यात्मिक चेतना और भक्ति का सजीव उदाहरण है।